राजस्थान जिसकी संस्कृति और परम्पराएं इसको सबसे अलग बनाती हैं| जहां महिलाओं का घूँघट उनकी अदब से रूबरू कराता है और पुरुषों की पोशाक से उनकी संस्कृति की झलक दिखाई देती है| राजस्थान में कहीं रास्तों में पड़ने वाले गाँव हैं तो कहीं रेत पर पड़ने वाली सुनहरी धूप| कहीं रास्तों में चलते समय अपनी संस्कृति को दर्शाते हुए पारंपरिक पोशाक पहने लोग हैं तो कहीं यहाँ के पाक व्यंजन की खुशबू| तो ऐसे राजस्थान को घूमने के लिए ‘अजमेर डिवीजन’ पर चर्चा तो बनती है|
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अजमेर डिवीजन : राजस्थान में घूमने की जगह
तो हम आज के लेख में बात करेंगे अजमेर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले पर्यटक स्थलों की जहां जाकर राजस्थान की संस्कृति की झलक पाकर आपको यह एहसास जरूर होगा कि इन अनजान रास्तों की वजह से हमने हमारी मंजिल का सफर बहुत ही खूबसूरत तय किया है| ऐसे तो अजमेर डिवीजन के अंदर 6 जिले शामिल किए जाते हैं लेकिन इनमें घूमने की जगह की बात की जाए तो चार जिले अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा और टोंक कुछ अलग और खास है जो अपने अंदर राजस्थान की मिट्टी की अनोखी खुशबू को महकाए हुए है| तो आगे बढ़ते हैं और जानते हैं राजस्थान यात्रा के इन पर्यटक स्थलों के बारे में विस्तार से-
अजमेर
अजमेर एक छोटा सा जिला लेकिन जिसका अतीत बड़ा ही दिलचस्प है| जयपुर से मात्र 135 किलोमीटर (लगभग) की दूरी पर स्थित अजमेर, अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों से घिरी हुई सुरम्य घाटी में स्थित है| अजमेर शहर का नाम ‘अजय मेरु’ के नाम पर रखा गया है जिसका अर्थ ‘अजेय पहाड़ी’ है| अजमेर हिंदुओं के साथ ही साथ मुसलमानों का भी पवित्र तीर्थ स्थल है क्योंकि यहाँ पर ही महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती का अंतिम विश्राम स्थल भी है|

अजमेर से मात्र 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुष्कर, हिंदुओं की आस्था का केंद्र है जहां पर भगवान ब्रम्हा जी का एकमात्र मंदिर है| अजमेर को राजस्थान में घूमने की जगह में शामिल कर आप यहाँ के पवित्र तीर्थ स्थलों की धूल का स्पर्श कर सकते हैं और अध्यात्म की अनुभूति कर सकते हैं|
अजमेर में घूमने की जगह-
अजमेर शरीफ की दरगाह, अकबरी मस्जिद, मेयो कॉलेज, तारागढ़ किला, फॉय सागर झील, सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक, महाराणा प्रताप स्मारक, अढ़ाई दिन का झोपड़ा, अजमेर गवर्नमेंट म्यूजियम, घंटाघर, साई बाबा मंदिर, आनसागर झील, किशनगढ़ का किला, अजमेर का किला तथा स्वामी विवेकानंद स्मारक आदि अजमेर के प्रमुख स्थान हैं|
नागौर

महाभारत में उल्लेखनीय नागौर जिले का अधिकतर भाग मैदानी है तो कुछ हिस्सा पहाड़ियों और रेगिस्तानी धोरों से बना हुआ है| मूल रूप से नागाओं के शासन वाला जिला नागौर जिसकी नींव चौथी शताब्दी ईसा पूर्व की है| नागौर में मंदिर, किले तथा मस्जिद के रूप में कई ऐतिहासिक स्थान हैं जिनका यहाँ पर एक गौरवपूर्ण स्थान है| नागौर ने प्राचीन समय में अपनी ऐतिहासिक गाथाओं के चलते शक्तिशाली मुगल साम्राज्य को चुनौती देने वाले महान राव अमर सिंह राठौर की वीरता को भी देखा|
जोधपुर और बीकानेर के बीच स्थित नागौर एक छोटा सा शहर है जहां का नागौर पशु महोत्सव, राजस्थान के प्रसिद्ध आकर्षणों में से एक है जिसको देखने के लिए देश के कोने-कोने से पर्यटक यहाँ आते हैं| एक छोटा सा शहर होने के बावजूद भी नागौर प्राचीन वास्तुकला के अनूठे उदाहरणों को संजोये हुए है जिसे राजस्थान में घूमने की जगह में शामिल कर इसके इतिहास को करीब से जाना जा सकता है|
नागौर में घूमने की जगह-
नागौर का किला, मीराबाई मंदिर, जैन ग्लास मंदिर, लाडनूं, खींवसर किला, खाटू, जायल, अमर सिंह की समाधि, कुचामन शहर, बड़े पीर साहब दरगाह, पशुपतिनाथ मंदिर, झोरड़ा तथा अहिछत्रगढ़ किला और संग्रहालय आदि नागौर में घूमने की सबसे बेहतरीन जगहें हैं|
भीलवाड़ा

900 वर्ष पुराना भीलवाड़ा वस्त्र नगरी के रूप में विश्व भर में प्रसिद्ध है| वास्तुकला के अद्भुत उदाहरण वाले बदनोर के किले से लेकर सुरम्य पहाड़ियों के दृश्य के बीच हरनी महादेव तक राजस्थान के भीलवाड़ा में पर्यटकों के आकर्षण के कई केंद्र हैं जो इसमें राजस्थान की छवि की प्रस्तुति करते हैं| पौराणिक कथाओं, संस्कृति और परंपरा का अनोखा संगम दर्शाने वाला भीलवाड़ा, जहां की राजपूत लोककथाएं आज भी उनसे जुड़ी हुई हैं, पर्यटकों के लिए प्राकृतिक सुंदरता तथा पारंपरिक इतिहास वाले कई स्थानों को समाए हुए है जिन्हें आप भीलवाड़ा जाकर देख सकते हैं और अपनी ट्रिप की सुंदरता को बढ़ा सकते हैं|
भीलवाड़ा में घूमने की जगह-
बदनोर का किला, हरनी महादेव, आसींद गाँव, श्री बीड़ के बालाजी मंदिर, बागोर साहिब, मेजा बांध, बिजोलिया, मेनाल वॉटरफाल, चामुंडा माता मंदिर, श्री चारभुजानाथ मंदिर, धनोप माता जी, मांडल, त्रिवेणी, क्यारा के बालाजी, माधव गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र तथा पुर उड़न छतरी आदि भीलवाड़ा के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं|
टोंक

राजस्थान राज्य के प्रसिद्ध जिलों में से एक टोंक को ‘राजस्थान का लखनऊ’ तथा ‘अदब का गुलशन’ जैसी संज्ञाओं से भी जाना जाता है| जयपुर से मात्र 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित टोंक, पूर्व में सवाई माधोपुर, पश्चिम में अजमेर जिला तथा उत्तर में जयपुर जिले से अपनी सीमा साझा करता है| पुरानी हवेलियों, बड़ी मस्जिदों, ऐतिहासिक स्थानों तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए मशहूर टोंक, मुगल और राजपूत शिल्पकला के उत्कृष्ट उदाहरणों को समाए हुए है|
राजस्थान के इस खूबसूरत जिले टोंक में पहले अफगानिस्तान के पठानों का शासन हुआ करता था| शानदार संरचनाओं तथा सांस्कृतिक विरासत का मिश्रण लिए हुए टोंक दुनिया भर से पर्यटकों को अपने दीदार के लिए आकर्षित करता है| राजस्थान के छोटे लेकिन खूबसूरत जिले टोंक को अपनी राजस्थान यात्रा में शामिल कर अपनी यात्रा को और भी मनोरम अवश्य बनाएं| टोंक से जुड़ी हुई अन्य किसी जानकारी के लिए आप टोंक जिले की आधिकारिक वेबसाईट भी देख सकते हैं|
टोंक में घूमने की जगह-
जल देवी मंदिर, जामा मस्जिद, घंटा घर, अरबी और फारसी शोध संस्थान, सुनहरी कोठी, हाथी भाटा, बीसलदेव मंदिर, डिग्गी कल्याण जी मंदिर, हादी रानी बावड़ी, श्री देवनारायण मंदिर तथा बीसलपुर बांध आदि टोंक में घूमने की जगह हैं|
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इस प्रकार हमारा यह लेख ‘राजस्थान यात्रा’ यहीं समाप्त होता है जिसमें हमने आपको राजस्थान के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के नाम के साथ ही साथ अजमेर डिवीजन के अंतर्गत आने वाले सभी पर्यटक स्थलों के बारे में बताया है| राजस्थान से जुड़ी हुई अन्य जानकारी के बारे में जानने के लिए हमारे लेख ‘राजस्थान में घूमने की जगह’ को भी पढ़ें| अगर हमारी दी गई जानकारी से संतुष्ट हो तो अपने प्रियजनों के साथ भी अधिक से अधिक साझा करें और इसी तरह हमें अपना स्नेह देते रहें| आपकी यात्रा मंगलमय हो| धन्यवाद|





