राजस्थान जो कि ‘राजाओं की भूमि’ कहा जाता है तो उसी शाही अंदाज में खुद को प्रस्तुत भी करता है| ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना से ओत-प्रोत राजस्थान अपनी संस्कृति और सुंदरता से दुनिया भर में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है| यही कारण है विश्व के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक राजस्थान में देश के ही नहीं बल्कि विदेश के फ़िल्मकारों ने भी यहाँ पर अपनी फिल्मों की शूटिंग कराई है| इस ब्लॉग में राजस्थान के दक्षिण पूर्व में स्थित कोटा डिवीजन के बारे में हम सभी विस्तार से जानेंगे|
बात हो शानदार हवेलियों वाले जयपुर शहर की या बात हो झीलों के शहर उदयपुर की, बात हो अगाध शक्ति वाले मंदिरों की या बात हो अद्भुत वास्तुकला वाले उदाहरणों की प्रस्तुति करते हुए महलों की, राजस्थान अपने अंदर सभी तरह के रंगों को भरे हुए है जो इसकी सुंदरता में चार चाँद अवश्य लगाते हैं|
राजस्थान के हर कोने में कुछ न कुछ खास है, कहीं पर मिट्टी की भीनीं- भीनीं खुशबू है तो कहीं यहाँ के लजीज व्यंजनों की महक| ऐसे में इस रंगीन राजस्थान में घूमने की जगह की बात न हो यह कैसे संभव है? तो अपनी राजस्थान यात्रा में एक और कदम आगे बढ़ाते हैं और जानते हैं राजस्थान के अंतर्गत आने वाले कोटा डिवीजन के बारे में|
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कोटा डिवीजन : राजस्थान में घूमने की जगह : राजस्थान यात्रा -6 : Best Places to Visit in Kota Division
राजस्थान के कोटा डिवीजन के अंतर्गत आने वाले जिले कोटा, बूंदी, बारां तथा झालावाड़ हैं जहां पर पर्यटकों हेतु कुछ न कुछ खास अवश्य है, जिनके बारे में हम इस लेख में विस्तार से चर्चा करेंगे| तो अपनी राजस्थान यात्रा को फिर से शुरू करते हैं और जानते हैं कोटा डिवीजन के इन जिलों में घूमने की जगह के बारे में|
कोटा

राजस्थान राज्य के दक्षिण पूर्व में स्थित कोटा शहर, जयपुर से 253 किलोमीटर (लगभग) की दूरी पर स्थित है| कोटा 1631 में एक स्वतंत्र राज्य बन गया था जब बूंदी के राव रतन के दूसरे बेटे राव माधो सिंह को मुगल सम्राट जहांगीर द्वारा कोटा का शासक बनाया गया| कोटा में एशिया के बड़े उर्वरक संयंत्रों में से एक, उर्वरक संयंत्र तथा अणु शक्ति संयंत्र भी स्थित हैं|
कोटा देश का एक प्रमुख कोचिंग हब है जहां पर करोड़ों की तादाद में विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों के लिए देश के कोने-कोने से आते हैं क्योंकि यहाँ पर कई श्रेष्ठ मेडिकल तथा इंजीनियरिंग कोचिंग संस्थान हैं| विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने वाले कोटा में पर्यटकों के लिए कई लोकप्रिय आकर्षण भी हैं जिनमें इतिहास का बखान करते हुए महाराव माधो सिंह संग्रहालय से लेकर फैमिली के इन्जॉय के लिए किशोर सागर झील, सेवन वंडर्स पार्क तक कई पर्यटन स्थल हैं जिनके कारण राजस्थान के तीसरे सबसे अधिक आबादी वाले शहर के रूप में प्रसिद्ध कोटा को आपकी राजस्थान यात्रा में शामिल न करना, आपकी यात्रा को कुछ अधूरा सा रख सकता है|
कोटा में घूमने की जगह-
चंबल रिवर फ्रन्ट, गढ़ पैलेस, महाराव माधो सिंह संग्रहालय, छत्र विलास गार्डन, ट्रैफिक गार्डन, सेवन वंडर्स पार्क, चंबल गार्डन, किशोर सागर झील, जग मंदिर, अभेद महल, कोटा जूलॉजिकल पार्क, मथुराधीश मंदिर, गैपरनाथ वॉटरफाल, कोटा गवर्नमेंट म्यूजियम, गणेश उद्यान, सिटी पार्क, खड़े गणेश जी का मंदिर, गराडिया महादेव मंदिर, दर्रा वन्यजीव अभयारण्य, कोटा बैराज, कैथून, कंसुआ मंदिर, शिवपुरी मंदिर, बृजराज भवन पैलेस, चंबल हैंगिंग ब्रिज, उम्मेद भवन पैलेस तथा गोदावरी धाम मंदिर आदि कोटा के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं|
बूंदी

‘हाड़ौती की रानी’ के नाम से जाना जाने वाला बूंदी अपने किलों, महलों, नक्काशीदार खंभों वाली छतरियों तथा सीढ़ीदार कुओं के लिए मशहूर है| अरावली पहाड़ियों की दरार में बसे बूंदी का नाम यहाँ के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों के बीच के संकरे रास्ते या बंदों नाल के नाम पर रखा गया है| ऐसा भी कहा जाता है कि बूंदी का नाम आदिवासी सरदार बूंदा मीणा के नाम पर रखा गया है|
बूंदी के गौरवशाली अतीत के बारे में यहाँ के किले, स्मारक तथा भित्ति चित्रों से सजे हुए महल बखूबी बताते हैं| तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरे हुए इस सुरम्य स्थान में बलिदान और शौर्य की गाथाएं भरी पड़ी हैं| सांस्कृतिक और पारंपरिक पृष्ठभूमि से ओत-प्रोत बूंदी की सांस्कृतिक विरासत समृद्ध होने के साथ ही साथ विविधतापूर्ण भी है जिसकी झलक यहाँ के स्थानीय शिल्प, लोकनृत्य और यहाँ के व्यंजन में देखने को मिलती है|
बूंदी में घूमने की जगह-
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, धाभाई कुंड, नवल सागर झील, सुखमहल, जेत सागर झील, तारागढ़ दुर्ग, चित्रशाला, चौरासी खंभों की छतरी, रानी जी की बावड़ी, रामेश्वर वॉटरफाल, भीमलत वॉटरफाल, मोती महल, गढ़ पैलेस तथा बूंदी पैलेस आदि प्रमुख पर्यटन स्थल हैं|
बारां

प्राचीन समय में कोटा जिले का हिस्सा रहा बारां का गठन 10 अप्रैल 1991 को किया गया था| राजस्थान राज्य के दक्षिणी-पूर्वी कोने में स्थित बारां मध्य प्रदेश राज्य के शिवपुरी और गुना जिलों के साथ सीमा साझा करता है| बारां विशेष तौर पर आयोजित किए जाने वाले ‘डोल मेला’ के लिए जाना जाता है जो डोल ग्यारस के बाद लगभग 20 दिनों तक मनाया जाता है|
अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से सभी के आकर्षण का केंद्र बना बारां व्यंजन, रंग और स्थानीय शिल्प में भी अपनी अनूठी छाप छोड़े हुए है| पारंपरिक पृष्ठभूमि वाला बारां अपने शैल चित्र के माध्यम से एक लंबे इतिहास की अभिव्यक्ति करता हैं जिसकी झलक को देखने के लिए आप इसे राजस्थान में घूमने की जगह में शामिल कर सकते हैं|
बारां में घूमने की जगह-
सीता बाड़ी, रामगढ़ भंडदेवरा मंदिर, शेरगढ़ किला, शेरगढ़ अभयारण्य, तपस्वियों की बगीची, शाहबाद किला तथा मनिहार महादेव मंदिर आदि बारां में घूमने की जगह हैं|
झालावाड़

ऐतिहासिक भूमि ‘झालावाड़’ ‘झालों की भूमि’ है जिसमें इतिहासप्रेमियों के लिए कई पसंदीदा स्थान है जिनका अतीत बहादुरी से भरा हुआ है और पर्यटकों को सबसे अधिक आकर्षित करता है| प्राचीन समय में ‘बृजनगर’ के नाम से मशहूर झालावाड़ की स्थापना कोटा राज्य के तत्कालीन दीवान झाला जालिम सिंह प्रथम ने की थी|
इतिहास के साथ ही साथ प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर झालावाड़, घने जंगलों से घिरा हुआ है| फलों के उत्पादन में अपना सराहनीय सहयोग देने वाला झालावाड़ कई मनमोहक और ऐतिहासिक जगहों को समाए हुए है जिसकी खूबसूरती को देखने के लिए और इसके इतिहास के बारे में जानने के लिए झालावाड़ को अपनी राजस्थान यात्रा में शामिल करना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है|
झालावाड़ में घूमने की जगह-
झालावाड़ राजकीय संग्रहालय, झालावाड़ का किला, द्वारकाधीश मंदिर, पृथ्वी विलास पैलेस, दलहनपुर, भीमसागर बांध, लव-कुश वाटिका बडबेला, भवानी नाट्य शाला, झालरापाटन, चांदखेड़ी आदिनाथ मंदिर, सूर्य मंदिर, गागरोन किला, कोलवी तथा चंद्रभागा मंदिर आदि झालावाड़ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं|
यह भी पढ़ें-
इस प्रकार हमने हमारे लेख ‘राजस्थान यात्रा -6 ’ में हमारी राजस्थान यात्रा का एक और सफर तय कर लिया है जिसके माध्यम से हमने आपको राजस्थान के कोटा डिवीजन के अंतर्गत आने वाले जिलों के बारे में उचित जानकारी देने की पूरी कोशिश की है| आशा करते हैं आप हमारे द्वारा दी गई जानकारी से संतुष्ट होंगे और यह जानकारी आपकी राजस्थान यात्रा में मददगार साबित होगी| इसी आशा के साथ इस लेख को समाप्त करते हैं और मिलते हैं राजस्थान यात्रा के नए सफर में| अंत तक पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार| आपकी यात्रा मंगलमय हो|





